इतिहास लेखन और व्याख्या: जातिभेद का असली सच | Early India
क्या आपको कभी यह सवाल परेशान करता है कि जातिभेद की जो तस्वीर आज हमारे सामने है, वह वास्तव में अतीत का सच है या किसी ख़ास दृष्टिकोण से गढ़ी हुई कहानी?आख़िर क्यों…
क्या आपको कभी यह सवाल परेशान करता है कि जातिभेद की जो तस्वीर आज हमारे सामने है, वह वास्तव में अतीत का सच है या किसी ख़ास दृष्टिकोण से गढ़ी हुई कहानी?आख़िर क्यों…
दलित आंदोलन और आधुनिक भारत : भारत में जाति व्यवस्था केवल धार्मिक या सामाजिक ग्रंथों तक सीमित नहीं रही; इसका प्रभाव राजनीति, समाज और लोकतंत्र पर गहराई से पड़ा है। Gail Omvedt की…
कभी सोचा है… भारत जैसे विशाल देश में, जहाँ वेद-पुराणों ने “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश दिया, वहीं जातिभेद जैसी अमानवीय परंपरा कैसे जन्मी? यह सवाल अपने आप में एक रहस्य है। और…
👉 सोचिए!अगर आपको कोई कहे कि भारत की सभ्यता और संस्कृति की नींव समानता पर नहीं, बल्कि जातिभेद और गुलामी पर रखी गई थी, तो क्या आप विश्वास करेंगे?यही सवाल 19वीं सदी के…
सोचिए! क्या कभी आपने यह महसूस किया है कि हमारे समाज में जन्मजात भेदभाव की जड़ें कितनी पुरानी हैं? कुछ विद्वानों का कहना है कि यह केवल आधुनिक समय की समस्या नहीं है,…
क्या आपने कभी सोचा है कि भारतीय समाज में जातिभेद आखिर शुरू कहाँ से हुआ?क्या यह केवल एक सामाजिक प्रथा थी, या इसके पीछे धार्मिक आधार भी था? जब हम इतिहास की परतें…
सोचिए…अगर 1600 के दशक में कोई साधारण मराठा बालक यह कहे कि –“मैं अपनी जनता के लिए स्वतंत्र राज्य बनाऊँगा, जहाँ किसी बादशाह, सुलतान या सरदार की मनमानी नहीं चलेगी…”तो क्या आप यकीन…
क्या आपने कभी सोचा है कि सिर्फ 16 वर्ष की आयु में शिवनेरी किले से निकला एक बालक, आगे चलकर “हिंदवी स्वराज्य” का संस्थापक कैसे बना?उस बालक का नाम था 👉 शिवबा (छत्रपति…
👉 ज़रा सोचिए…अगर 17वीं शताब्दी में भारत की धरती पर छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म न हुआ होता, तो क्या आज हमें “स्वराज्य” शब्द की ताक़त समझ में आती?क्या हिंदवी स्वराज्य का सपना…
सोचिए!अगर आपको यह कहा जाए कि मानव सभ्यता की जड़ें अफ्रीका नहीं, बल्कि भारत में हैं, तो क्या आप यकीन करेंगे?और अगर यह भी सुन लें कि दुनिया का पहला धर्म कोई विदेशी…