📝अगर बाजीप्रभु पावनखिंड में नहीं रुके होते तो…? | पावनखिंड का असली इतिहास और बलिदान
इतिहास में कुछ लड़ाइयाँ तलवारों से नहीं…👉 बलिदान से जीती जाती हैं… सन 1660…एक तरफ हजारों दुश्मन सैनिक…और दूसरी तरफ कुछ मावले… लेकिन उस रात…एक योद्धा अकेला खड़ा था मौत के सामने… 👉…
