📜नट जाति का असली इतिहास – Nat Caste History in India
क्या आपने कभी किसी मेले में देखा है वो कलाकार, जो हवा में कलाबाज़ी करता है, ज़मीन पर नृत्य करता है और अपनी कला से सबको मंत्रमुग्ध कर देता है? क्या आपने सोचा है कि ये लोग कौन हैं, जिनकी ज़िंदगी ही मनोरंजन और रहस्य से भरी है? भारत के इतिहास में एक ऐसी जाति रही है, जिसे लोग जादूगर, नर्तक और बाजीगर के नाम से जानते हैं — और वही है नट जाति।

नट (Nat) जाति भारत की एक पारंपरिक समुदाय है, जो मुख्यतः उत्तर भारत में पाई जाती है और ऐतिहासिक रूप से नृत्य, कलाबाजी, गायन और मनोरंजन कला के लिए प्रसिद्ध रही है। यह समुदाय आज कई राज्यों में अनुसूचित जाति (SC) या डिनोटिफाइड ट्राइब के रूप में वर्गीकृत है।
🧬 उत्पत्ति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि :
- नाम की उत्पत्ति: “नट” शब्द संस्कृत के नट या नटा से निकला है, जिसका अर्थ है नर्तक या कलाकार।
- इतिहास:
- नट समुदाय पारंपरिक रूप से मनोरंजन, नृत्य, कलाबाजी और जादू‑टोना में संलग्न रहा।
- बिहार के नट अपने को राजपूत वंशज मानते हैं और बाजीगर जाति से समान परंपराएँ रखते हैं।
- पंजाब में नट समुदाय का दावा है कि वे मूल रूप से मारवाड़ के ब्राह्मण थे जिनका कार्य अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी उपलब्ध कराना था।
🌾 पारंपरिक पेशा और सामाजिक योगदान :
- मुख्य व्यवसाय:
- नृत्य, गायन, कलाबाजी, जादू‑टोना और मेले/दरबारों में मनोरंजन।
- ग्रामीण मेलों और राजदरबारों में प्रदर्शन।
- सांस्कृतिक पहचान:
- नट समुदाय की कला का उल्लेख महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है।
🌍 वर्तमान स्थिति :
- जनसंख्या:
- उत्तर प्रदेश (2011): ~2.14 लाख
- बिहार (2023): ~1.66 लाख
- राजस्थान (2011): ~65,000
- राज्यवार दर्जा:
- राजस्थान, बिहार, हरियाणा में अनुसूचित जाति (SC)।
- कुछ राज्यों में Denotified Tribe (पूर्व “criminal tribes” वर्गीकरण)।
- आधुनिक चुनौतियाँ:
- भूमिहीनता, आर्थिक असुरक्षा और पारंपरिक कला पर निर्भरता।
- आधुनिकरण के कारण पारंपरिक पेशे में गिरावट।
📜 असली ऐतिहासिक प्रमाण :-
| प्रमाण | स्रोत | विवरण |
|---|---|---|
| Census Data (2011, 2023) | Govt. of India | उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में जनसंख्या आँकड़े। |
| Wikipedia – Nat caste | Wikipedia | उत्पत्ति, उपसमूह और परंपराएँ। |
| Grokipedia (2026) | Grokipedia | SC और Denotified Tribe वर्गीकरण, सामाजिक स्थिति। |
🔚 निष्कर्ष :
“नट” जाति सिर्फ एक उपनाम नहीं — यह कला, मनोरंजन और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। भारत के इतिहास में नट समाज ने नृत्य, कलाबाजी और लोककला के माध्यम से समाज को आनंद और पहचान दी है, लेकिन आज यह समुदाय सामाजिक‑आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है।
