राज्याभिषेक और प्रशासन: छत्रपति शिवाजी महाराज का असली रहस्य :-

(क्या आप जानते हैं कि शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि ऐसा राजनीतिक मोड़ था जिसने भारत की सत्ता की दिशा बदल दी? वह सुबह जब रायगढ़ किले पर शंखनाद हुआ, तब केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक नया प्रशासनिक ढांचा जन्म ले रहा था — जिसे आज भी “अष्टप्रधान मंडल” के नाम से याद किया जाता है। आखिर क्या था उस मुकुट की असली शक्ति और किस तरह शिवाजी ने अपने प्रशासन को इतिहास का सबसे अनुशासित तंत्र बनाया? आइए जानें…)


राज्याभिषेक: एक दिन जिसने इतिहास बदल दिया :

6 जून 1674, रायगढ़ किला। चारों तरफ सजावट, वेद-मंत्रों की गूंज, पंडितों का जमावड़ा और हजारों की भीड़। शिवाजी महाराज ने अपने सिर पर मुकुट धारण किया और बन गए “छत्रपति शिवाजी महाराज”

लेकिन यह राज्याभिषेक केवल एक धार्मिक रस्म नहीं था — यह था स्वतंत्र हिंदवी राज्य की घोषणा

  • अब वह किसी मुगल या आदिलशाही के अधीन नहीं रहे।
  • अब सत्ता होगी जनता की, शासन होगा जवाबदेह और प्रशासन होगा व्यवस्थित।

यही कारण है कि यह राज्याभिषेक भारतीय इतिहास में सबसे अनोखी और निर्णायक घटना मानी जाती है।


🔍 चुनौतियाँ:

  • ब्राह्मण वर्ग ने शिवाजी की क्षत्रियता पर सवाल उठाया।
  • काशी से गागा भट्ट को बुलाया गया, जिन्होंने मेवाड़ के सिसोदिया वंश से शिवाजी का संबंध प्रमाणित किया।
  • विरोध के बावजूद, शिवाजी ने दो बार राज्याभिषेक कराया—पहला जून में और दूसरा अक्टूबर में, जब उनकी माता जीजाबाई का देहांत हो गया।

शिवाजी महाराज का प्रशासनिक ढांचा :

राज्याभिषेक के साथ ही शिवाजी महाराज ने एक संगठित शासन प्रणाली स्थापित की। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों के लिए अष्टप्रधान मंडल (Council of Eight Ministers) का निर्माण किया।

अष्टप्रधान मंडल (Council of Eight)

  • पेशवा (प्रधानमंत्री): शासन संचालन और राज्य के मुख्य निर्णय।
  • अमात्य (वित्त मंत्री): खजाने और कर-प्रणाली का प्रबंधन।
  • सचिव: सभी पत्राचार और प्रशासनिक दस्तावेज़।
  • सुमंत/दाबीर: विदेश नीति और अन्य राज्यों से संबंध।
  • सेनापति: सेना का संगठन और युद्धनीति।
  • न्यायाधीश: कानून और न्याय व्यवस्था।
  • पंडितराव: धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों की देखरेख।
  • मान्याधिकारी: राजस्व व सैनिक मामलों का सहयोगी प्रबंधन।

शासन प्रणाली की खास बातें :

  • किले — शक्ति और प्रशासन की रीढ़
    शिवाजी ने किलों को न केवल युद्ध के लिए, बल्कि प्रशासनिक केन्द्र के रूप में भी विकसित किया।
  • लोक प्रशासन और पंचायत
    गाँव स्तर पर पंचायत व्यवस्था को मान्यता मिली, जिससे प्रशासन जनता तक पहुँचा।
  • कर और राजस्व व्यवस्था
    सुव्यवस्थित कर प्रणाली लागू की गई ताकि सेना और प्रशासन दोनों चल सकें।
  • नौसेना और कूटनीति
    शिवाजी ने नौसेना की नींव रखी और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की।

विवाद और आलोचना :

राज्याभिषेक के समय सबसे बड़ा विवाद उनकी जाति और धार्मिक वैधता को लेकर था। कई विद्वानों ने आपत्ति उठाई, पर अंततः गगा भट्ट ने उन्हें वैध क्षत्रिय घोषित किया।


विरासत और महत्व :

शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक और प्रशासन आज भी “संगठित शासन” का आदर्श है।

  • संगठित प्रशासन
  • जवाबदेह शासन
  • जनता केंद्रित व्यवस्था

प्रमाण / संदर्भ (Proofs & Sources) :

नीचे दिए गए ग्रंथ और बख़ानें (bakhars), तथा आधुनिक ऐतिहासिक लेखन उन स्रोतों में शामिल हैं जिनसे उपर्युक्त तथ्य साबित होते हैं। आप इन्हें अपनी पोस्ट के अंत में “संदर्भ” के रूप में जोड़ सकते हैं:

  1. साभासद बखर (Sabhasad Bakhar) — (प्रारम्भिक मराठी बखर जो राज्याभिषेक और निकटवर्ती घटनाओं का जीवंत विवरण देता है)।
  2. चितनीस बखर (Chitnis Bakhar) — मराठा दरबारी बखर — प्रशासनिक संरचना व निर्णयों के विवरण के लिए उपयोगी।
  3. जदुनाथ सरकार — “Shivaji and His Times” — आधुनिक ऐतिहासिक विश्लेषण और संदर्भों का संग्रह।
  4. James Grant Duff — “History of the Mahrattas” — अंग्रेज़ी में शुरुआती समसामयिक-नज़र से मराठा इतिहास का लेखा।
  5. राजकीय अभिलेख / मराठा दस्तावेज़ (State records & Maratha correspondence) — जहाँ उपलब्ध हों (उदाहरण: रायगढ़ पत्राचार, राजपत्र) — स्थानीय अभिलेखों में प्रशासन के निर्णयों के प्रमाण मिलते हैं।
  6. समकालीन बख़ानें और क्षेत्रीय लोक-परस्परिक लेख (Various Marathi chronicles & regional records) — स्थानीय घटनाओं और प्रथाओं का विवरण।

🔚 निष्कर्ष: एक राजा नहीं, एक युग का आरंभ :

शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक और प्रशासनिक दृष्टिकोण केवल इतिहास नहीं है—वह एक विचार है, एक प्रेरणा है, और एक उदाहरण है कि जब नेतृत्व में साहस, नीति और धर्म का समावेश हो, तो राष्ट्र का पुनर्जन्म संभव है।

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