युद्ध और रणनीति: शिवाजी महाराज की अद्वितीय सैन्य दृष्टि :-
क्या एक किशोर बालक, जो सह्याद्रि की पहाड़ियों में खेलता था, एक दिन मुगलों और सल्तनतों की नींव हिला सकता है? यह सवाल ही उस रहस्य की शुरुआत है, जिसने भारत के इतिहास को बदल दिया। एक ऐसा योद्धा जिसने न केवल युद्ध जीते, बल्कि रणनीति की परिभाषा ही बदल दी। यही कारण है कि उन्हें “जानता राजा” कहा जाता है — एक ऐसा राजा जो हर युद्ध, हर चाल, हर भूगोल और हर भावना को जानता था।

🔥 बचपन से युद्ध तक: रणनीति की नींव :
शिवाजी महाराज का जन्म 1630 में शिवनेरी किले में हुआ। माता जीजाबाई ने उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियों से प्रेरित किया, और पिता शाहजी भोसले ने उन्हें राजनीतिक समझ दी। बचपन से ही शिवाजी ने सह्याद्रि की पहाड़ियों में घूम-घूम कर भूगोल को समझा — यही उनकी गणिमी कावा (छापामार युद्ध नीति) की नींव बनी।
⚔️ गणिमी कावा: छापामार युद्ध की कला :
शिवाजी महाराज ने पारंपरिक युद्ध की बजाय छापामार शैली अपनाई:
- दुश्मन पर अचानक हमला
- तेज़ी से पीछे हटना
- दुश्मन की आपूर्ति लाइन काटना
- पहाड़ी इलाकों का लाभ उठाना
- सीमित संसाधनों में अधिकतम प्रभाव
यह रणनीति इतनी प्रभावशाली थी कि मुगलों जैसे विशाल साम्राज्य भी भ्रमित हो गए।
🏰 किलों की रणनीति: सुरक्षा और नियंत्रण :
शिवाजी ने 300 से अधिक किलों का निर्माण या पुनर्निर्माण किया:
- राजगढ़, सिंहगढ़, प्रतापगढ़ जैसे किले ऊँचाई पर स्थित थे, जिससे रक्षा आसान होती थी।
- हर किला एक रणनीतिक बिंदु था — युद्ध के समय आश्रय, आपूर्ति और योजना का केंद्र।
- किलों का स्थान ऐसा चुना गया था कि दुश्मन की घुसपैठ असंभव हो जाए।
🌊 नौसेना की क्रांति: समुद्री शक्ति का उदय :
शिवाजी पहले भारतीय राजा थे जिन्होंने संगठित नौसेना बनाई:
- जंजीरा, सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग जैसे किले समुद्र किनारे बनाए।
- पुर्तगाली, डच और अंग्रेजों से रक्षा के लिए जहाज़ों का निर्माण किया।
- कोलाबा किला को नौसेना का मुख्यालय बनाया।
इसीलिए उन्हें “भारतीय नौसेना का जनक” कहा जाता है।
🧠 खुफिया तंत्र और नेतृत्व शैली :
- शिवाजी ने एक मजबूत खुफिया नेटवर्क बनाया जो दुश्मन की हर गतिविधि की जानकारी देता था।
- उन्होंने विकेन्द्रित नेतृत्व अपनाया — हर सेनापति को स्वतंत्रता दी गई ताकि निर्णय तेजी से लिए जा सकें।
- उन्होंने अपने सैनिकों को स्थानीय भाषा, भूगोल और संस्कृति से परिचित कराया ताकि युद्ध में लाभ मिले।
🛡️ प्रमुख युद्ध और रणनीतिक विजय :
| युद्ध | रणनीति | परिणाम |
|---|---|---|
| अफ़ज़ल खान वध | व्यक्तिगत भेंट में छुपा हुआ हथियार | विजय और क्षेत्र विस्तार |
| पन्हाला से बचाव | बाजी प्रभु देशपांडे का बलिदान | शिवाजी की सुरक्षित वापसी |
| सूरत पर हमला | आर्थिक केंद्र पर आक्रमण | मुगलों की आर्थिक कमजोरी |
| पुरंदर संधि | रणनीतिक समझौता | समय और संसाधन की बचत |
| सिंहगढ़ युद्ध | तानाजी मालुसरे की वीरता | किले की पुनः प्राप्ति |
| शाइस्ता खान पर हमला | रात में छापामार हमला | मुगलों की शर्मनाक हार |
👑 “जानता राजा” क्यों?
- शिवाजी ने चौथ और सरदेशमुखी जैसे कर लागू किए ताकि सेना को आर्थिक सहायता मिले।
- उन्होंने हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की — एक ऐसा राज्य जो जनता के लिए था, न कि किसी सल्तनत के लिए।
- उनकी राज्याभिषेक विधि ने उन्हें वैध और धार्मिक रूप से स्वीकार्य राजा बनाया।
- उन्होंने हर युद्ध, हर नीति, हर भूगोल और हर जनभावना को समझा — इसीलिए उन्हें “जानता राजा” कहा गया।
📚 ऐतिहासिक प्रमाण और स्रोत :-
1. सभासद बखर (Sabhasad Bakhar) – 1694–1697 CE
- लेखक: कृष्णाजी अनंत सभासद, जो शिवाजी महाराज के समकालीन थे।
- यह बखर राजाराम महाराज के आदेश पर लिखी गई थी।
- इसमें अफजल खान वध, शाइस्ता खान पर हमला, पुरंदर संधि, आगरा यात्रा, और किलों की व्यवस्था का विस्तार से वर्णन है।
- यह बखर शिवाजी महाराज के जीवनकाल के तुरंत बाद लिखी गई थी, इसलिए इसे प्राथमिक स्रोत माना जाता है।
🔗 सभासद बखर – Archive.org पर उपलब्ध
2. चिटणीस बखर (Chitnis Bakhar) – 1811 CE
- लेखक: मल्हारराव रामराव चिटणीस, जिनके पूर्वज शिवाजी महाराज के दरबारी थे।
- इसमें सिंहगढ़ युद्ध, तानाजी मालुसरे की वीरता, और शिवाजी की युद्ध नीति का वर्णन है।
- यह बखर सभासद बखर पर आधारित है और उसे विस्तार देती है।
🔗 बखर – विकिपीडिया पर विवरण
3. पुरातात्विक प्रमाण (Archaeological Evidence)
🔸 राजगढ़, सिंहगढ़, प्रतापगढ़ किले:
- इन किलों में आज भी शिवकालीन जल व्यवस्था, गुप्त मार्ग, और तोपखाने के अवशेष देखे जा सकते हैं।
- राजगढ़ में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था — यह एक ऐतिहासिक स्थल है।
🔸 सिंधुदुर्ग किला:
- शिवाजी महाराज द्वारा समुद्री सुरक्षा के लिए बनवाया गया।
- इसमें आज भी शिवाजी महाराज के पदचिन्ह पत्थर पर सुरक्षित हैं — यह एक भौतिक प्रमाण है।
4. शिवकालीन पत्र और फरमान
- शिवाजी महाराज के हस्ताक्षरित पत्र, जो मुगलों को भेजे गए थे, आज भी राज्य अभिलेखागार में सुरक्षित हैं।
- इनमें उनकी रणनीति, राजनीतिक समझौते, और युद्ध की योजना का उल्लेख मिलता है।
5. अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र (Peer-reviewed Research)
- Dr. Manjanna T. द्वारा लिखा गया शोधपत्र: “Military Innovations and Guerrilla Warfare Tactics of Chhatrapati Shivaji Maharaj” इसमें गणिमी कावा, किलों की रणनीति, नौसेना, और खुफिया तंत्र का विश्लेषण है।
🔗 IJRAR Research Paper PDF
