स्वराज्य स्थापना : एक अधूरी ख्वाहिश से जन्मा साम्राज्य

सोचिए…
अगर 1600 के दशक में कोई साधारण मराठा बालक यह कहे कि –
“मैं अपनी जनता के लिए स्वतंत्र राज्य बनाऊँगा, जहाँ किसी बादशाह, सुलतान या सरदार की मनमानी नहीं चलेगी…”
तो क्या आप यकीन करते?

उस समय यह सपना पागलपन लगता था।
मुग़ल साम्राज्य अपनी शक्ति के चरम पर था, दक्षिण में आदिलशाही और कुतुबशाही जैसी सल्तनतें हावी थीं।
लेकिन इसी असंभव सपने को हकीकत बनाया छत्रपति शिवाजी महाराज ने – और इस सपने का नाम था “स्वराज्य”।


✦ स्वराज्य का असली मतलब

  • स्वराज्य का अर्थ केवल सत्ता या गद्दी नहीं था।
  • यह था – जनता का शासन, जनता के हक़ और सम्मान की रक्षा।
  • शिवाजी महाराज ने कहा था –
    👉 “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।”

✦ स्वराज्य की शुरुआत कहाँ से हुई?

  1. जिजाबाई की प्रेरणा
    • छोटी उम्र से ही माँ जिजाऊ ने शिवबा को रामायण, महाभारत और वीर रस की कहानियाँ सुनाईं।
    • उन्होंने बेटे को सिखाया कि – अन्याय के खिलाफ खड़े होना ही सबसे बड़ा धर्म है।
  2. तोरणा किले की जीत (1646)
    • मात्र 15 साल की उम्र में शिवबा ने पहला किला तोरणा जीता।
    • यह जीत सिर्फ़ एक किले की नहीं थी, बल्कि स्वराज्य की नींव थी।
    • इसी किले का नाम बाद में रखा गया – प्रचंडगढ
  3. जनता का साथ
    • शिवाजी महाराज ने अपने सैनिक “मावले” सीधे जनता में से चुने।
    • यह जनता और राजा का मिलन ही था जिसने स्वराज्य को जन्म दिया।

✦ स्वराज्य स्थापना के बड़े पड़ाव

  • 1659 – अफजलखान वध : प्रतापगढ की लड़ाई ने स्वराज्य को मजबूत पहचान दी।
  • 1664 – सूरत लूट : मुग़लों की आर्थिक ताकत पर गहरी चोट।
  • 1666 – आगरा से पलायन : औरंगज़ेब की कैद से साहसी बच निकलना।
  • 1674 – रायगढ़ राज्याभिषेक : स्वराज्य का औपचारिक उद्घोष, शिवाजी महाराज बने छत्रपति

✦ स्वराज्य की विशेषताएँ

  • धर्मनिरपेक्ष राज्य : हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए समान न्याय।
  • संगठित प्रशासन : अष्टप्रधान मंडल, संगठित महसूल व्यवस्था।
  • आर्थिक सुधार : किसानों की सुरक्षा, व्यापारियों की आज़ादी।
  • नौसेना की स्थापना : समुद्र पर भी स्वराज्य का परचम।

✦ स्वराज्य का संदेश

शिवाजी महाराज का स्वराज्य हमें आज भी यही सिखाता है –
👉 “जनता का असली राज्य वही है जहाँ जनता का मान-सम्मान सुरक्षित हो।”


✅ ऐतिहासिक प्रमाण

यह सारी घटनाएँ और तथ्य कई विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोतों में प्रमाणित हैं –

  1. सब्हासद बखर (1697) – शिवाजी महाराज के समकालीन कृष्णाजी अनुपम द्वारा लिखित।
  2. चाफेकर बंधुओं का शिवचरित्र
  3. जदुनाथ सरकार – “Shivaji and His Times” (1919)
  4. गवर्नमेंट ऑफ महाराष्ट्र – शिवचरित्र संहिता
  5. रायगड, तोरणा और प्रतापगढ किले के शिलालेख एवं दफ्तर दस्तावेज़।

🔶 निष्कर्ष :
स्वराज्य की स्थापना कोई साधारण घटना नहीं थी। यह थी –
एक माँ की प्रेरणा, एक बालक का सपना और लाखों जनमानस की शक्ति।
यही कारण है कि आज भी “स्वराज्य” केवल इतिहास नहीं, बल्कि हर भारतीय के दिल का जज़्बा है।

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